योगासनों से समग्र लाभ लें | योग के लाभ - Hindi Motivation

पतंजलि योग में यम नियम के बाद आसनों का क्रम आता है | यम नियम यहां मानसिक स्थिरता एवं सामाजिक संतुलन के हेतु हैं, तो वही आसन व्यक्ति को स्वास्थ्य, सबल, एवं निरोगी बनाए रखने में सहायता करते हैं | बिना स्वास्थ्य एवं निरोग जीवन के योग के धारणा ध्यान जैसे प्रयोगों की कल्पना भी नहीं की जा सकती |

योग के लाभ - Hindi Motivation

आसन वे शारीरिक मुद्राएं एवं क्रियाएं हैं, जो व्यक्ति को सुख पूर्वक लंबे समय तक बैठने में सहायक सिद्ध होती हैं | साथ ही आसनों में ऐसे व्यायाम भी आते हैं जो व्यक्ति को आंतरिक रूप से सबल एवं पुष्ट बनाते हैं और जो सुक्ष्मग्रंथियों के जागरण में सहायता कर गुप्त रूप में आध्यात्मिक लाभ पहुंचाते हैं | आसनों में कुछ बैठकर किए जाते हैं, कुछ लेट कर तो कुछ खड़े रहकर | 

आसनो के प्रकारों

आसनो के इन प्रकारों के अंतर्गत उनकी संख्या को लेकर कई मत है | नित नए उभरते इनके रूपों के मध्य इनकी संख्या कुछ सैकड़ों से लेकर हजारों तक पहुंच जाती है | हालांकि शास्त्रों में सर्वमान्य प्रचलित आसनों की संख्या 84 ही मानी जाती है |

उनकी खोज अधिकांश विभिन्न प्राणियों की शारीरिक मुद्राओं के आधार पर हुई है | जब भी शरीर को तानकर या खींचकर शरीर को चैतन्य बनाते हैं | इसी आधार पर विभिन्न ने आसन कुछ इस प्रकार से नामांकित हैं जैसे की कुक्कुटासन, गरुड़ासन, मयूरासन, सिहासन, उष्ट्रासन, और भुजंगासन आदि |

आसन और पहलवानी

यह आसन और पहलवानी कसरतों के बीच अंतर जानना अभीष्ट हो जाता है | आज की पीढ़ी का रुझान आसनों की बजाए वेट ट्रेनिंग एवं बॉडीबिल्डिंग की ओर अधिक है , जिसके लिए वह घंटों जिम में जाकर पसीना बहाते हैं तथा कुछ ही दिनों में उनके शरीर की मांसपेशियां उभरने लगती हैं, गठीली हो जाती हैं व प्रदर्शन योग्य हो जाती हैं |

यहां इनकी कोई बुराई नहीं की जा रही है लेकिन शरीर सौष्टव कि इन पहलवानी कसरतों के साथ शरीर के कुछ ही हिस्सों, जैसे बाहरी मांसपेशियों का विकास होता है; जबकि आसनों में समग्र रूप मैं मांसपेशियों का व्यायाम होता है |

दीर्घकालीन स्वास्थ्य

इसी कारण से दीर्घकालीन स्वास्थ्य की दृष्टि से आसनों का कोई तोड़ नहीं है | इनके द्वारा शरीर के आंतरिक अंग अवयवों की भी अच्छी खासी मालिश एवं कसरत होती है | इसके साथ शरीर में विद्यमान सुख ग्रंथियों एवं चक्र गतिशील हो जाते हैं, जो व्यक्ति को शारीरिक ही नहीं, मानसिक एवं आध्यात्मिक लाभ भी देते हैं | इसलिए योग में आसनों को महत्व दिया गया है | 

हालांकि सभी आसनों को करने की भी आवश्यकता नहीं होती है | अपने शरीर की आवश्यकता, आयु एवं शषकता के आधार पर इनका चयन किया जा सकता है | ध्यान के लिए मुख्यता पद्मासन, सिद्धासन, सुखासन, आदि को उपयुक्त माना जाता है | इसी तरह शरीर स्वास्थ्य एवं सौष्टव की दृष्टि से भुजंगासन, नौकासन, नटराजाआसन आदि आसनों का प्रयोग किया जाता है |

आसनों के प्रारंभ में मांसपेशियों एवं घुटनों की जकड़न को दूर करने के लिए वार्म आप कसरत को किया जाता है, जिसके अंतर्गत गर्दन, पंजे, घुटने, कमर, कलाई, हाथ, उंगलियां, कोनी, कंधे आदि को क्रमवार लिया जा सकता है | 

प्रज्ञायोग व्यायाम को हर आयु का व्यक्ति कर सकता है | इससे सभी प्रमुख अंगों की जकड़न दुर्बलता दूर होने की शरीर दूर होने से शरीर में लोच आती है एवं शक्ति का संचार होता है | इसी प्रकार सूर्य नमस्कार को किया जा सकता है जिस में 12 आसनों का क्रम सूर्य को ध्यान में रखते हुए संपन्न किया जाता है | 

निष्कर्ष

इन याम - नियमों का उल्लंघन करने से आंतरिक जीवन में अनेक ग्रंथियां बन जाती हैं, जो स्वास्थ्य और सुखी जीवन के लिए बड़ी बाधाएं खड़ी कर देती हैं | स्वास्थ्य सुखी जीवन की कल्पना करने वालों को अपने आहार विहार, चिंतन, चरित्र के बारे में भी जागरूक रहना आवश्यक है | 

इस प्रकार आसनों को अपनी आवश्यकता क्षमता और अवस्था को देखते हुए जीवन क्रम का हिस्सा बनाया जा सकता है और योग साधना का अंग मानते हुए इनसे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक दृष्टि से समग्र लाभ दिया जा सकता है |

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