महामारी से मुक्त होने का सटीक उपाय - Hindi Knowledge

आज पुरे विश्व में महामारी का प्रकोप व्याप्त है | इस त्रासदी से सभी त्रस्त है | यह त्रासदी एक प्रकोप से अभूतपूर्व है, जो न तो पहले देखि गई और न सुनी गई | इसके साथ ही प्राकृतिक आपदाएं भी समय-समय पर आती रहती हैं | जैसे बाढ़ भूकंप आंधी तूफान तथा दुर्घटना जब तक होती रहती है | 

संसार के सभी देश इससे बचने का उपाय खोज रहे हैं | नई नई बीमारियां तथा असाध्य रोग का आक्रमण जनमानस में पूरी तरह व्याप्त हो रहा है विपरीत परिस्थितियां व्यष्टि व्यक्तिगत रूप में तथा समस्त अर्थात सामूहिक रूप में दोनों प्रकार से आती हैं और इनका निवारण के लिए सभी प्रयास कर रहे हैं |

महामारी से मुक्त होने का सटीक उपाय - Hindi Knowledge

इसके साथ ही प्राकृतिक आपदाएं भी समय-समय पर आती रहती हैं जैसे बाढ़ भूकंप आंधी तूफान तथा दुर्घटना जब तक होती रहती है | संसार के सभी देश इससे बचने का उपाय खोज रहे हैं, नई नई बीमारियां तथा असाध्य रोग का आक्रमण जनमानस में पूरी तरह व्याप्त हो रहा है | विपरीत परिस्थितियां व्यष्टि व्यक्तिगत रूप में तथा समस्त अर्थात सामूहिक रूप में दोनों प्रकार से आती हैं और इनका निवारण के लिए सभी प्रयास कर रहे हैं |

भारतीय संस्कृति

भारतीय संस्कृति की एक विशेषता है कि यह किसी भी समस्या के समाधान के तीन विकल्प है अधिभौतिक, अधिदैविका, एवं आध्यात्मिक | जब कोई व्यक्ति अस्वस्थ होता है अथवा किसी असाध्य रोग से ग्रसित होता है तो इसके निवारण के लिए वह जो प्रयास करता है वह उसका अधिभौतिक प्रयास होता है | 

परंतु कभी-कभी जब तक पहुंचे प्रयास कर थक जाता है और निराश होने लगता है तो उसे अधिदेविक और अध्यात्मिक प्रयास के द्वारा सफलता प्राप्त हो जाती है | यह सफलता भी प्रकट रूप में यद्यपि भौतिक प्रयास के माध्यम से ही प्राप्त होती है | 

आधिदैविक और अध्यात्मिक प्रयत्न

आधिदैविक और अध्यात्मिक प्रयत्न अपनी आस्था और विश्वास पर आधारित है जब कभी देश समाज और राष्ट्र पर विपत्ति आती है तो उसके निवारण के लिए भारत में अधिक दैविक उपायों के रूप में अनुष्ठान यज्ञ भी कराए जाते हैं और उनके प्रमाण भी अनुकूल होते हैं| 

परंतु यह प्रक्रिया केवल भारतीय दर्शन और शास्त्रों पर आधारित है | विदेशों में अथवा पश्चात संस्कृति में इस प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं है इसीलिए इनकी सामने भौतिक उपाय से अतिरिक्त कोई दूसरा मार्ग नहीं है | 

वर्तमान समय में अपने देशवासियों के लिए सौभाग्य की बात है कि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र जी मोदी एक आस्थावान व्यक्ति हैं, जिनका अध्यात्म में पूर्ण विश्वास है इसके कारण इनके द्वारा देश के कई महत्वपूर्ण कार्य संपन्न हो सके हैं | अध्यात्मिक शक्ति प्राप्त हुए बिना दुरूह कार्य इतनी सरलता से संपन्न नहीं हो सकते | 

इस समय कोविड-19 महामारी का असर कम होते नहीं दिख रहा है, इसके साथ ही कोरोनावायरस अपना रूप भी बदलता है | इसे रोकने के लिए कई देश इस का टीका बनाने का प्रयास भी कर रहे हैं भारत भी इस कार्य में संलग्न है |  यह टिका बन भी गया तो यह कितना उपयोगी होगा इसकी अभी कोई गारंटी नहीं है, और इसका बनना भी  संदेहप्रद भी लग रहा है | 

वास्तव में कोरोना एक वैश्विक आपदा है, जो पूरे देश को प्रभावित करती हैं, अतः इसके निवारण के लिए भौतिक उपाय के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर आध्यात्मिक उपाय भी करने की आवश्यकता है | जिससे विपत्ति पूरी तरह समाप्त हो सके | 

इस वैश्विक आपदा की समाप्ति के लिए अध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण उपाय है, जिसे पूर्ण आस्था एवं विश्वास के साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्रयुक्त किया जाए तो निश्चित रूप में संपूर्ण जनमानस इस आपदा से मुक्त हो सकेगा | 

पिछले दिनों भगवान श्री राम की जन्मभूमि पर मंदिर के निर्माण का शुभारंभ और उसकी पूजा बड़े समारोह के साथ आपने प्रधानमंत्री जी द्वारा संपन्न हुई | भगवान राम और भगवान कृष्ण हम सब के इष्ट हैं अथार्त हमारे आराध्य हैं और इनकी आराध्या भगवती गौमाता है |

गौ रक्षा एवं गौ सेवा

अपने शास्त्र तो कहते हैं कि गाय में संपूर्ण देवी देवताओं का निवास है, गाय की सेवा पूजा से संपूर्ण देवी देवताओं की आराधना संपन्न हो जाती है | गौ सेवा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पदार्थ सिद्ध होते हैं | हमारे करमानुष्ठान, यज्ञ आदि तथा कोई भी धार्मिक कृत्य गौ माता के बिना संपन्न नहीं हो सकते है | 

इसके अतिरिक्त एक अत्यंत महत्वपूर्ण है अनुभव की बात है कि गौ रक्षा एवं गौ सेवा के अनुष्ठान से कोई भी लौकिक एवं भौतिक कामना की पूर्ण निश्चित रूप से होती है | इसमें किसी प्रकार का संदेह अथवा शंका नहीं की जा सकती |

अतः कोरोनावायरस जैसी आपदा और महामारी से मुक्त होने के लिए अध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने की दृष्टि से राष्ट्रीय स्तर पर गौ रक्षा का संकल्प होना चाहिए | गौ रक्षा के लिए सबसे पहला काम है कि देश में गौ हत्या बंद की जाए | 

गौ हत्या

स्वतंत्रता प्राप्त के बाद पूर्ण रूप से गोहत्या बंदी के लिए देश में बड़े-बड़े आंदोलन और सत्याग्रह हुए | अनशन और उपवास किए गए देश के संत महात्मा, साधु सन्यास ने स्वयं को गिरफ्तार कराकर भारत की जेलों को भरा | कई महापुरुषों ने इस जघन्य कार्य को रोकने के लिए अपना बलिदान भी दिया, फिर भी देश में अब तक पूर्ण रूप से गौ हत्या बंद नहीं हुई |

भारत भूमि के किसी भी कोने मैं यदि गोरक्त गिरता है तो देशवासियों के लिए यह अत्यंत लज्जा की बात है | भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की इस पवित्र धरा पर जहां बुद्ध और गांधी जैसे संतों ने सत्य और अहिंसा का दीप जलाया, वहां जब तक गोमाता के रक्त की एक भी बूंद गिरती रहेगी, तब तक हम इस महान पाप से मुक्त नहीं हो सकते तथा देश की समस्याओं का स्थाई समाधान प्राप्त नहीं किया जा सकता | इसलिए संत महात्मा और महापुरुष प्रारंभ से ही इस काले कारनामे का विरोध करते आ रहे हैं | 

गोवंश हत्या बंदी

अतः केंद्रीय सरकार द्वारा गोवंश हत्या बंदी का एक मजबूत कानून बनाया जाना चाहिए, जिससे देश के संपूर्ण भागों में गौ हत्या पूर्णतः बंद हो जाए | 

साथ ही भारत सरकार को अन्य देशों के साथ गौ मांस का निर्यात और व्यापार अविलम्ब बंद कर देना चाहिए | यदि इसके लिए संविधान में संशोधन करने की आवश्यकता हो तो उसे भी यथाशीघ्र कर लेना उचित होगा |

निष्कर्ष

गौ रक्षा का यह महान कार्य सरकार और जनता दोनों के सहयोग से ही होना संभव है | यह एक ऐसा अनुष्ठान है, जिसे भारत सरकार एवं जनता जनार्दन के द्वारा यदि पूरी आस्था और विश्वास के साथ संपन्न कर लिया गया तो महामारी से मुक्त होने के लिए राष्ट्रीय को अध्यात्मिक शक्ति पूर्ण रूप से प्राप्त हो सकेगी, साथ ही इस कोरोनावायरस से मुक्त होने के लिए किए गए सभी प्रयास पूर्ण रूप से सफल होंगे | 

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