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Showing posts from January, 2021

HSCC India Limited Recruitment 2021 | Apply 21 Engineering Vacancies

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About Job HSCC India is recruiting the Engineers on a contract / immediate absorption basis for its ongoing and future assignments. HSCC India Limited is inviting applications from dynamic and result oriented professionals for the appointment of Civil/Electrical/Mechanical/Architecture Engineers.  Total Vacancy:  Name of Post Total Vacancy Architecture 01 Civil/Electrical/Mechanical 20 Pay Scale / Salary:  Architecture: ₹ 30000 - 120000 Civil / Electrical / Mechanical: ₹ 29000 – 110000 Age Limit: Architecture: 24 Years Civil / Electrical / Mechanical: 40 Years Educational Qualification: For Civil / Electrical / Mechanical: B.E. / B.Tech engineering graduate in Electrical / Civil / Mechanical engineering discipline. Minimum 03 years post qualification experience. For Architecture:  B.Arch with 01-year post qualification experience. Application Fees: UR/OBC candidates - ₹ 1,000/- EWS/SC/ST category candidates - ₹ 50

योगासनों से समग्र लाभ लें | योग के लाभ - Hindi Motivation

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पतंजलि योग में यम नियम के बाद आसनों का क्रम आता है | यम नियम यहां मानसिक स्थिरता एवं सामाजिक संतुलन के हेतु हैं, तो वही आसन व्यक्ति को स्वास्थ्य, सबल, एवं निरोगी बनाए रखने में सहायता करते हैं | बिना स्वास्थ्य एवं निरोग जीवन के योग के धारणा ध्यान जैसे प्रयोगों की कल्पना भी नहीं की जा सकती | आसन वे शारीरिक मुद्राएं एवं क्रियाएं हैं, जो व्यक्ति को सुख पूर्वक लंबे समय तक बैठने में सहायक सिद्ध होती हैं | साथ ही आसनों में ऐसे व्यायाम भी आते हैं जो व्यक्ति को आंतरिक रूप से सबल एवं पुष्ट बनाते हैं और जो सुक्ष्मग्रंथियों के जागरण में सहायता कर गुप्त रूप में आध्यात्मिक लाभ पहुंचाते हैं | आसनों में कुछ बैठकर किए जाते हैं, कुछ लेट कर तो कुछ खड़े रहकर |  आसनो के प्रकारों आसनो के इन प्रकारों के अंतर्गत उनकी संख्या को लेकर कई मत है | नित नए उभरते इनके रूपों के मध्य इनकी संख्या कुछ सैकड़ों से लेकर हजारों तक पहुंच जाती है | हालांकि शास्त्रों में सर्वमान्य प्रचलित आसनों की संख्या 84 ही मानी जाती है | उनकी खोज अधिकांश विभिन्न प्राणियों की शारीरिक मुद्राओं के आधार पर हुई है | जब भी शरीर को तानकर या खींच

महामारी से मुक्त होने का सटीक उपाय - Hindi Knowledge

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आज पुरे विश्व में महामारी का प्रकोप व्याप्त है | इस त्रासदी से सभी त्रस्त है | यह त्रासदी एक प्रकोप से अभूतपूर्व है, जो न तो पहले देखि गई और न सुनी गई | इसके साथ ही प्राकृतिक आपदाएं भी समय-समय पर आती रहती हैं | जैसे बाढ़ भूकंप आंधी तूफान तथा दुर्घटना जब तक होती रहती है |  संसार के सभी देश इससे बचने का उपाय खोज रहे हैं | नई नई बीमारियां तथा असाध्य रोग का आक्रमण जनमानस में पूरी तरह व्याप्त हो रहा है विपरीत परिस्थितियां व्यष्टि व्यक्तिगत रूप में तथा समस्त अर्थात सामूहिक रूप में दोनों प्रकार से आती हैं और इनका निवारण के लिए सभी प्रयास कर रहे हैं | इसके साथ ही प्राकृतिक आपदाएं भी समय-समय पर आती रहती हैं जैसे बाढ़ भूकंप आंधी तूफान तथा दुर्घटना जब तक होती रहती है | संसार के सभी देश इससे बचने का उपाय खोज रहे हैं, नई नई बीमारियां तथा असाध्य रोग का आक्रमण जनमानस में पूरी तरह व्याप्त हो रहा है | विपरीत परिस्थितियां व्यष्टि व्यक्तिगत रूप में तथा समस्त अर्थात सामूहिक रूप में दोनों प्रकार से आती हैं और इनका निवारण के लिए सभी प्रयास कर रहे हैं | भारतीय संस्कृति भारतीय संस्कृति की एक विशेषता है कि य

अशांति के कारण एवं उनके निवारण - Hindi Knowledge

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हर व्यक्ति जीवन में सुख शांति चाहता है, लेकिन यह बहुत ही कम लोगों को नसीब हो पाता है इसके कारणों पर विचार कर हम इसका बहुत सीमा तक निदान कर सकते हैं और सुखी एवं संतुष्ट जीवन की ओर कदम बढ़ा सकते हैं|  दूसरों से बड़ी चढ़ी आशा व अपेक्षा दुख का बड़ा कारण बनती है, जब कोई अपनी आशा के अनुकूल नहीं निकलता तो एक झटका सा लगता है मुंह बंद की स्थिति आ जाती है तथा विक्षुब्ध हो जाता है \ समझ आता है कि किसी से भी अत्यधिक आशा अपेक्षा नहीं लगा कर रखनी थी ऐसा प्राय अधिक राग एवं आसक्ति  के कारण होता है | अनुभवहीनता हम जल्दबाजी में या जीवन के उथले प्रवाह मे या अनुभवहीनता  के कारण किसी व्यक्ति का सम्यक मूल्यांकन नहीं कर पाते हैं या तो उसे देवता मान बैठते हैं और उसकी पूजा करते हैं | यह सीधा शैतान मान कर उसके साथ परित्यक सा व्यवहार करते हैं, जबकि हर इंसान इन सब का एक मिश्रण होता है | उसकी अपनी विशेषताएं होती हैं साथ ही अपनी मानवीय सीमाएं भी यह समझ हमें व्यक्ति से अनावश्यक आशा अपेक्षा करने से बचाती है और आगे चलकर दुखी होने से रोकती है | इंद्रिय सुख इंद्रिय सुख में जीवन के अर्थ की तलाश भी दुख का एक बड़ा कारण बनत

बाहर की दौड़ मे जीवन का उदेश्श्य न भूल बैठे हम - निबंध

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मानवीय स्वभाव है कि हम आंकड़ों के स्थान पर घटनाक्रमों की भाषा को बेहतर समझते हैं, इसलिए बच्चों को गणित के स्थान पर कहानियां सिखा समझा पाना ज्यादा आसान होता है | इन्ही मे से कुछ कहानियां आगे चलकर सिद्धांतों का रूप ले लेती हैं |  सिद्धांत धीरे-धीरे योजनाओं में बदल जाते हैं और एक दिन वो योजनाएं भी कार्य रूप में परिणत हो जाती है | यदि विगत सदी के समस्त घटनाक्रमों को एक दर्शनिक दृष्टि से नजर दौड़ा कर देखें, तो हम पाएंगे कि विगत सदी में मानवता के सम्मुख मुलरूपेण तीन तरह की कहानियां आई है इन्हीं कहानियों को हम तीन सिद्धांत या तीन  मान्यताओं के नाम से भी पुकार सकते हैं |  इनमे से पहली मान्यता कट्टरपंथी सोच के रूप में थी, जिसे विश्व भर में नाजीवाद या फॉसिजम के नाम से जाना जाता है |  बाहर की दौड़ मे जीवन का उदेश्श्य न भूल बैठे हम पिछली सदी की शुरुआती वर्षों में लगभग हर राष्ट्र इसी चिंता के आगोश में सांसे लेता दिखाई पड़ता था | जर्मनी,  इटली, जापान की स्थिति मान्यता को द्वितीय विश्व युद्ध ने लगभग पूर्णरूपेण नकार दिया गया एवं जापान कको,  हिरोशिमा, और नागासाकी जैसे लोमहर्षक कांडो का साक्षी बनना पड़ा | 

समस्या और समाधान - Motivational Story

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किसी भी समस्या का जन्म बाद में होता है, जबकि समाधान उससे पूर्व ही विद्वान रहता है | दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसका समाधान ना हो | कोई ऐसा प्रश्न नहीं जिसका उत्तर ना हो, बस अंतर मात्र इतना है कि वह समाधान उत्तर हमारे संज्ञान में आ सकता कि नहीं आ सकता | यदि आ गया तो हमारी बुद्धि ने उसे स्वीकारा कि नहीं | हमको लगता है कि मंजिलें बाद में तय हुई, उनको प्राप्त करने के मार्ग पहले से ही है बस उन राहों पर सुविधाओं का समायोजन बाद में होता है |  जैसे श्री बद्रीनाथ जाने के लिए व्यक्ति 2000 साल पहले भी जाते थे, 200 साल पहले भी जाती थी, 20 वर्ष पहले जो लोग गए वह कहते हैं कि अब रास्ते में तथा श्रीधाम में बहुत बदलाव आ गया एक बात याद रखना " राहें बदलती रहती है कभी मंजिले नहीं बदला करती " राह क्या है? जहां से चलकर आप गंतव्य तक पहुंचे वही तो रहा है | गंतव्य पाने के लिए आप मानिक पथ का आश्चर्य अथवा स्वयं पथ का निर्माण करें |  भाई समस्या हमारी सोच के ऊपर मात्र है सकारात्मक सोच हर समस्या में भी समाधान पर चिंतन के कारण आगे बढ़ने के उपाय खोज लेती है जबकि नकारात्मक सोच समाधान की पलों को भी

पाप और पुण्य | Motivational Story

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महर्षि वेदवियासने अनेक ग्रंथो की रचना की उनके द्वारा रचित श्रीमद्भागवत मनुष्य मात्र के लिये न केवल जीवन बल्कि मृत्यु की सार्थक ताका सन्देश है | सात दिन बाद मृत्यु है यह जानने के बाद कोई कैसे शांत रेह सकता है |  मृत्यु का वरण कैसे हो यह भागवतजी का बड़ा सन्देश है एक बार नारद जी ने महर्षि देववयास से यह प्रशन किया की इस महापुराण को कोई न पढ़े तो सार रूप मे उसके लिये आपका सन्देश क्या है महर्षि वेदवियासनेसार सन्देश कहा | दूसरे का हित चिंतन ही पुण्य और दूसरे को पीड़ा पहुँचाना ही पाप है | अगर कोई अठारह पुराण न पढ़े तो यही वचन उसके जीवन को निर्मल बना देने के लिये बहुत है |  दूसरे का हित चिंतन ही पुण्य रामायण हो या भागवतजी सबका मूल सन्देश एक ही है वह है परोपकार नानक हो या कबीर सबने यही कहा है की परोपकार यदि किसी मनुष्य मे उतर जाये तो वह समझिये सरे तीर्थ कर चुका, सारे ग्रन्थ पढ़ चुका | औषधियो में नहीं है स्वस्थ जीवन का सूत्र - निबंध कृपानुभूति - भगवन पर भरोसा रखिये सब कुछ अच्छा होगा | सच्ची घटना Byju's Classes क्या है और इसके फायदे क्या है ? उसी तरह जिसका उद्देश्य मात्र दुसरो को पीड़ा पहुँचाना है

सब नाम रूपों मे एक ही भगवान | Motivation

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भारतीय संस्कृति में सबसे मुख्य भेद माने जाते हैं वे अपौरुषेय है, अनादि है और सदा रहने वाले नित्य है | उनमे तीन काण्ड माने जाते है | उन्ही तीनों का विशद एवं विस्तृत वर्णन पुराण और इतिहास ग्रंथो मे मिलता है जिनकी रचना सुन्दर सुन्दर कथाओ के द्वारा सर्व साधारण जनता को गंभीर विषय सरलता से समझाने के लिये श्री ब्यास देव ने कृपापूर्वक की है | ऐसे तो पुराण भी अनादि ही माने जाते है पर इनका समय समय पर जीड़ाधार होता रहा | पुराणों में ही लेख मिलता है कि इनका कलेवर बहुत बड़ा था उनको अल्पायु कलि युगी जीवो के लिए संक्षिप्त रूप से बनाया गया है | इनमें सांसारिक तथा पारमार्थिक सर्वापयोगी सर्व विषयों का बड़ा अच्छा वर्णन किया गया है|  पढ़ने से मालूम होता है कि इनमें दैवी संपत्ति, आसुरी संपति, तीर्थ, व्रत, उपवास, ज्यज्ञ, दान, तप, संयम, सेवा, आश्रम धर्म, वर्ण धर्म, स्त्री धर्म,  सामान्य धर्म, राज्यधर्म, प्रजा धर्म, जाति, देश, काल, समय, संबंध, परिस्थिति, आदि को लेकर अवश्य कर्तव्य कर्म आदि विषयों का गूढ़ आशय सहित विचित्र ढंग से वर्णन हुआ है | साधारण रीती से देखने पर परस्पर बड़ा विरोध सा मालूम देता है, जिनका हम