उद्देश्यपूर्ण कर्म करे सफलता सुनिश्चित होगी - Motivation

"उद्देश्यपूर्ण कर्म करे सफलता सुनिश्चित होगी"

यह पंक्ति कोशिश करने के महत्व को बताती है | निश्चित रूप से हर कोशिश कामयाब नहीं होती लेकिन कई कोशिशों के बाद एक की कोशिश ऐसी होती है जो हम ही सीधे कामयाबी तक पहुंचा देती है |

उद्देश्यपूर्ण कर्म करे सफलता सुनिश्चित होगी - Motivation

कामयाबी तक पहुंचने से पहले यदि हार मान ली जाए, कोशिशें करनी बंद कर दी जाए तो फिर मंजिल तक पहुंचना संभव नहीं होता | जो अपनी हर कोशिश से अपने हर प्रयास से कुछ न कुछ सीखता है वही सकारात्मक होता है और अपनी मंजिल की ओर तेजी से बढ़ता है | लेकिन जो अपनी हर असफल कोशिश को नकारात्मक ढंग से देखता है, उसके कारण निराश होता है वह अपने लक्ष्य की ओर कभी नहीं बढ़ पाता |

कहानी 

इस बात को स्पष्ट करने वाला एक उल्लेखनीय प्रसंग है |

सन 1914 के आखिरी महीने के दिन थे | अभी एक रात अमेरिका के महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन की विशाल फैक्ट्री में आग लग गई आग धूं धूं करके तेज लपटों के साथ जल रही थी और एडिशन उड़ती हुई विकराल गरम लपटों में अपनी जिंदगी की पूरी कमाई और अपने वर्षों के काम को राख में तब्दील होते हुए देख रहे थे |

उसका 24 साल का बेटा चार्ल्स परेशान होकर अपने 67 साल के बूढ़े पिता को ढूंढ रहा था, अपने बेटे पर नजर पड़ते ही एडिसन ने चिल्लाकर उससे कहा चार्ल्स अपनी मां को बुला कर लाओ वह अपनी जिंदगी में इस तरह का द्रिश्य दोबारा कभी नहीं देख पाएगी |

सुबह होते-होते थॉमस एडिसन के सारे सपने और उनसे जुड़ी सारी आशाएं राख हो चुके थे, लेकिन एडिशन राख के उस ढेर में से फिनिक्स पक्षी की भांति एक नए रूप में बाहर आए |

दंत कथाओं के अनुसार फिनिक्स पक्षी अपने जीवन चक्र के अंत में खुद के इर्द-गिर्द लकड़ियां व टहनियां का घोंसला बनाकर उसमें जल जाता है फिर उसी राख से एक नए फिनिक्स का जन्म होता है | इस विनाश को देखने के लिए वहां एकत्रित हुई भीड़ मे एडिशन ने पूरे जोश व होश के साथ यह घोषणा की कि विध्वंस के बाद हानि नहीं लाभ होता है, हमारी सारी गलतियां इस आग में जलकर राख हो गई है |

ईश्वर को धन्यवाद कि इसके कारण दोबारा नई शुरुआत कर सकते हैं, फिर इस विध्वंसक घटना के कुछ दिनों बाद उनकी कंपनी ने अपना पहला फोनोग्राम तैयार कर लिया, निश्चित रूप से एडिशन के पास जो था वह तो खत्म हो चुका था लेकिन भविष्य तो अभी बाकी था |

साधन भले ही एडिशन के जलकर नष्ट हो गए थे, लेकिन समय अभी भी उसके साथ था | आग की भीषण ज्यालाओं में एडिसन ने अपने साधनों को गवाया था, लेकिन अपने अनुभवों को नहीं और फिर इन्हीं अनुभवों के सहारे उसने फिर से एक नई शुरुआत की और उसमें वह सफल हो गया |

इससे यह सीख मिलती है कि विफलता में रोने वाला मनुष्य होता है, लेकिन उस परिस्थिति में भी हंसने वाला देवता होता है ज्ञानवान होता है |

उद्देश्यपूर्ण कर्म करे सफलता सुनिश्चित होगी

विद्वान व्यक्ति यह जानता है कि सफलता के बीच असफलताओं की खाद व मिट्टी में ही पलते बढ़ते हैं, इन बीजों को पनपने में समय लग सकता है लेकिन जितना समय इन बीजों को असफलताओं की खाद मिट्टी से जूझते हुए पनपने में लगता है उतना ही मजबूत होता है और फिर जितना कम समय इन बीजो को पनपने में लगता है उतनी ही यह कमजोर होते हैं |

इसका अर्थ यह है जो जीवन में अधिक संघर्ष करते हुए असफलताओं को सहते हुए सफलता तक पहुंचते हैं वे उसका मूल्य समझते हैं और जितना ही मजबूती के साथ सफलता की ऊंचाइयों पर टिके रहते हैं लेकिन जो जितना कम संघर्ष करते हुए सफलता तक पहुंचते हैं उसका महत्व नहीं समझ पाते और ना ही सफलता उनका देर तक साथ दे पाती है |

प्रकृति हमें अपने उदाहरण से एक सीख देती है कि जीवन में हमें सब कुछ नहीं मिल सकता जो कुछ भी महत्वपूर्ण व बहुमूल्य समय मिलता है, उसमें भी हमें बहुत कुछ गवाना पड़ता है |

निष्कर्ष

उदाहरण के लिए वसंत ऋतु की शुरुआत होते ही आम के पेड़ बौर से लद जाते हैं यदि उस दौरान फूलों से लदे हुए बौरये आम के पेड़ों को ध्यान से देखा जाए तो आम के पेड़ की छोटी-छोटी टहनियों पर हरे पीले धानी रंग की छोटी-छोटी मानिको वाली इतनी सारी मंजरिया लटकती रहती है कि आम के पत्तों को भी ठीक से देख पाना मुश्किल होता है और आम के इन पेड़ों के नीचे बोर के इतने फूल घिरे होते हैं उन्हें देखकर लगता है कि पेड़ ने अपनी छाँह में एक सुंदर आसन बिछा लिया है |

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