कृपानुभूति - भगवन पर भरोसा रखिये सब कुछ अच्छा होगा | सच्ची घटना

यह एक सच्ची घटना है | मै भिंड जिले का निवासी हूँ, मेरे पेट के दाएं और काफी दर्द रहता था | करीब 5 वर्ष से मै  परेशान था चेक कराने पर डॉक्टर द्वारा बताया गया कि गाल  ब्लैडर में पथरी है | डायबिटीज के मरीज होने की वजह से ऑपरेशन कराने से घबरा रहा था और इसीलिए ऑपरेशन नहीं करा रहा था | 

कृपानुभूति - भगवन पर भरोसा रखिये सब कुछ अच्छा होगा | सच्ची घटना

जब दर्द  काफी बढ़ गया तो ग्वालियर जाकर परीक्षण कराकर ऑपरेशन कराने की सोची, तो डॉक्टरों ने करीब ₹50000 रुपयों का खर्च बताया | मैं खर्च वहन करने में असमर्थ था जैसे तैसे ईश्वर पर भरोसा करके ऑपरेशन कराने का निर्णय लिया | सभी प्रकार की जांच एवं परीक्षण के बाद 20 अक्टूबर 2008 ऑपरेशन की तारीख निश्चित हुई | 

कृपानुभूति - भगवन पर भरोसा रखिये सब कुछ अच्छा होगा

मैं पैसे के लिए परेशान था तभी मेरी पत्नी ने कहा कि मेरी बुआ का लड़का लखनऊ में मेडिकल कॉलेज में सर्जन है उसे सलाह ले ली जाए | मैंने तभी लखनऊ फोन पर बात की बात होने पर उसने सभी रिपोर्टों की जानकारी ली और खर्च के बारे में पूछा मैंने बताया कि यहां खर्च करीब 25000 आ रहा है तब उसने मुझे उसी वक्त कहा कि आप शीघ्र लखनऊ आ जाए मैं यहां ऑपरेशन करवा दूंगा | 

मैं एवं मेरी पत्नी दिनांक 26 अक्टूबर 2008 को लखनऊ पहुंच गए 27 अक्टूबर को वहां टेस्ट हुआ एवं ऑपरेशन की तारीख 29 अक्टूबर तय की गई अस्पताल में दूरबीन से ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया |  मैंने ऑपरेशन टेबल पर जाने के लिए कपड़े बदल लिए परंतु उसी वक्त डॉक्टरों ने कहा कि दूरबीन मशीन कार्य नहीं कर रही है | 

मुझे ऑपरेशन की टेबल से वापस कर दिया गया | काफी प्रयास के बाद भी ऑपरेशन नहीं हो सका मेरे साले जो कि सर्जन  थे उन्होंने प्राइवेट नर्सिंग होम में ऑपरेशन कराने का निश्चय किया मुझे उसी दिन सायकाल कृष्ण मेडिकल सेंटर ले जाया गया वहां पर मेरा  ऑपरेशन मेरे साले एवं सर्जन के द्वारा किया गया ऑपरेशन के बाद मेरा ब्लड प्रेशर हाई हो गया और चेतना नहीं लौटी |

मेरी पत्नी ऑपरेशन थिएटर के बाहर इंतजार कर रही थी  उसी वक़्त मेरे साले ने बाहर आकर मेरी पत्नी से पूछा कि क्या जीजा जी को ब्लड प्रेशर था | पत्नी ने बताया कि नहीं उधर मेरी चेतना लुप्त होती जा रही थी मेरे साले को कोई उम्मीद नहीं दिख रही थी अन्य रिश्तेदारों को भी उसने मोबाइल द्वारा सूचित किया कि मैं परेशान हूं | 

मैंने जीजाजी को यहाँ बुला कर क्या किया, मेरी पत्नी अपने भाई की घबराहटको समझ गयी और उसने सच्चे मन से देवी माँ को याद किया और कहाँ की हे माँ मैने सच्चे मन से तेरी सेवा की है तो मेरी विपदा हरो देविचालीसा  का पाठ जो कि हमेशा करती है वह करने लगी |

उसी समय मुझे आईसीयू में ऑक्सीजन पर लाया गया } मेरी पत्नी वहां मौजूद थी परंतु वह मेरे पास बैठी केवल देवी चालीसा का स्मरण कर रही थी साथ ही रामायण की चौपाइयां राम कृपाँ नासहि  सब रोगा जौ एहि भाँति बनै सयोगा एक ही रट लगाए हुए थे |

सभी डॉक्टर खड़े थे, पत्नी को कोई सुन रही थी वह तो एक रट  से चौपाई एवं देवी चालीसा का पाठ कर रही थी |  ऑपरेशन 6:00 बजे शाम हुआ था, करीब 11:00 बजे रात्रि में मुझे चेतना लौटने लगे तब मेरे कानों में मंदिर की घंटी एवं देवी चालीसा तथा रामायण की चौपाई सुनाई दी और चेतना फिर गायब हो गई | 

बाद में डॉक्टरों ने ऑक्सीजन हटा दी और करीब 12:00 बजे रात्रि को मुझे होश आ गया तो सबसे पहले मेरा पुत्र मेरे सामने खड़ा था |  मेरी चेतना लौटते ही वह  रोने लगा मैंने उससे कहा कि क्यों रो रहे हो मैं तो ठीक हूं दूसरे ही दिन मेरे साले साहब मुझे अपने घर ले गएकरीब 8 दिन रुकने के बाद मैं भिण्ड वापस आ गया | 

यह घटना से मेरा यह विश्वास हो गया की देवी माँ और रामायण की उपयुक्त चोपाई का स्मरण अगर सच्चे मन से किया जाये तो इसमें कोई शंका नहीं है की पूर्णरूपसे विपत्ति दूर हो जाएगी ईश्वर की कृपा से सब संभव है |

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