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Showing posts from December, 2020

निर्भयता - एक महान सद्गुण | Motivation

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निर्भयता मानवीय गुणों मे से एक महान सद्गुण है | सामान्यतया व्यक्ति भांति भांति के भय व चिंताओं से घिरा रहता है, जैसे स्वास्थ्य हानि की चिंता व भय धन समाप्ति का भय परिजनों के वियोग का भय आदि चिंता व भय से मन में नकारात्मक तत्वों का प्रवेश हो जाता है और इसके कारण फिर हम नकारात्मक सोचने लगते हैं और वस्तुओं और परिस्थितियों के प्रति नकारात्मक दद्रष्टि रखते हैं तथा सकारात्मक द्रष्टि से दूर भी हो जाते हैं | जीवन में आगे बढ़ने के लिए सकारात्मक दष्टिकोण का होना बहुत जरूरी है ,क्योंकि यही दष्टिकोण हमें आगे बढ़ने में मदद करता है, जबकि नकारात्मक दष्टिकोण हमारे आगे बढ़ने के सभी रास्तों को एक प्रकार से बंद कर देता है | यही कारण है कि जब व्यक्ति भय चिंता व अवसाद से ग्रस्त होता है तो वह इसी दलदल मे धसता चला जाता है | निर्भयता - एक महान सद्गुण उसे इन मनोविकारो से बाहर निकलने का कोई मार्ग नहीं मिलता,  नकारात्मत्क द्रष्टिकोर्ण की यह दलदल इतनी भयानक होती है कि फिर व्यक्ति आत्महत्या करने को ही एकमात्र समाधान समझता है | भयभीत चिंता व अवसाद से ग्रस्त रहना एक आप्रकर्तिक बात है , प्रकर्ति भी नहीं चाहती की मनुष

उद्देश्यपूर्ण कर्म करे सफलता सुनिश्चित होगी - Motivation

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"उद्देश्यपूर्ण कर्म करे सफलता सुनिश्चित होगी" यह पंक्ति कोशिश करने के महत्व को बताती है | निश्चित रूप से हर कोशिश कामयाब नहीं होती लेकिन कई कोशिशों के बाद एक की कोशिश ऐसी होती है जो हम ही सीधे कामयाबी तक पहुंचा देती है | कामयाबी तक पहुंचने से पहले यदि हार मान ली जाए, कोशिशें करनी बंद कर दी जाए तो फिर मंजिल तक पहुंचना संभव नहीं होता | जो अपनी हर कोशिश से अपने हर प्रयास से कुछ न कुछ सीखता है वही सकारात्मक होता है और अपनी मंजिल की ओर तेजी से बढ़ता है | लेकिन जो अपनी हर असफल कोशिश को नकारात्मक ढंग से देखता है, उसके कारण निराश होता है वह अपने लक्ष्य की ओर कभी नहीं बढ़ पाता | कहानी  इस बात को स्पष्ट करने वाला एक उल्लेखनीय प्रसंग है | सन 1914 के आखिरी महीने के दिन थे | अभी एक रात अमेरिका के महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन की विशाल फैक्ट्री में आग लग गई आग धूं धूं करके तेज लपटों के साथ जल रही थी और एडिशन उड़ती हुई विकराल गरम लपटों में अपनी जिंदगी की पूरी कमाई और अपने वर्षों के काम को राख में तब्दील होते हुए देख रहे थे | उसका 24 साल का बेटा चार्ल्स परेशान होकर अपने 67 साल के बूढ़े

औषधियो में नहीं है स्वस्थ जीवन का सूत्र - निबंध

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मानव की स्वस्थ रहने की चेष्टा आज की नहीं अपितु प्राचीन काल से चली आ रही है और यह चेष्टा संभवतः आगे भी चलती रहेगी | यह देखकर बहुत आश्चर्य होता है कि हम अपने स्वयं के शरीर को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारियों से मुँह मोड़कर स्वयं इसके लिए कुछ भी नहीं करके पूर्णतः दुसरो पर आशिक हो जाते हैं तथा अपने दायित्व उन लोगों को हस्तांतरित कर देते हैं जो रोग के निदान के लिए औषधियों एवं शल्य चिकित्सा का सहारा लेकर उसे निरोगी बनाने का आश्वासन देते हैं |  मानव शरीर को स्वस्थ रखने के लिए एलोपैथी , यूनानी, प्राकृतिक, आयुर्वेद, योग, होम्योपैथी मेगनेटिक, विचार चिकित्सा, हिपनोजियम, रैकी एक्यूप्रेशर, एवं पिरामिड पावर चिकित्सा, आदि पद्धतियां वर्तमान में उपयोग में आ रही है |   यह सभी पद्धतियां अपने-अपने तरीकों से मानव शरीर को निरोगी करने का दावा करती हैं | आज के युग में जब औषधि विज्ञान चरम सीमा पर पहुंच चुका है लोगों की संख्या में भी निरंतर बढ़ोतरी तथा जनमानस का गिरता स्वास्थय इस बात की ओर संकेत करता है कि क्यों नहीं हम एक ऐसी पद्धतियों को विकसित करें जिससे समस्त रोगों से छुटकारा पाकर हम अपना बचाव करते हुए स्वास्थ्य

कृपानुभूति - भगवन पर भरोसा रखिये सब कुछ अच्छा होगा | सच्ची घटना

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यह एक सच्ची घटना है | मै भिंड जिले का निवासी हूँ, मेरे पेट के दाएं और काफी दर्द रहता था | करीब 5 वर्ष से मै  परेशान था चेक कराने पर डॉक्टर द्वारा बताया गया कि गाल  ब्लैडर में पथरी है | डायबिटीज के मरीज होने की वजह से ऑपरेशन कराने से घबरा रहा था और इसीलिए ऑपरेशन नहीं करा रहा था |  जब दर्द  काफी बढ़ गया तो ग्वालियर जाकर परीक्षण कराकर ऑपरेशन कराने की सोची, तो डॉक्टरों ने करीब ₹50000 रुपयों का खर्च बताया | मैं खर्च वहन करने में असमर्थ था जैसे तैसे ईश्वर पर भरोसा करके ऑपरेशन कराने का निर्णय लिया | सभी प्रकार की जांच एवं परीक्षण के बाद 20 अक्टूबर 2008 ऑपरेशन की तारीख निश्चित हुई |  कृपानुभूति - भगवन पर भरोसा रखिये सब कुछ अच्छा होगा मैं पैसे के लिए परेशान था तभी मेरी पत्नी ने कहा कि मेरी बुआ का लड़का लखनऊ में मेडिकल कॉलेज में सर्जन है उसे सलाह ले ली जाए | मैंने तभी लखनऊ फोन पर बात की बात होने पर उसने सभी रिपोर्टों की जानकारी ली और खर्च के बारे में पूछा मैंने बताया कि यहां खर्च करीब 25000 आ रहा है तब उसने मुझे उसी वक्त कहा कि आप शीघ्र लखनऊ आ जाए मैं यहां ऑपरेशन करवा दूंगा |  मैं एवं मेरी पत्नी